इस साल आमों की फसल अच्छी नही है .गाँव गया था तो एकाध पेड़ पर कुछ आम नजर आए .एक तो घर के ठीक सामने वाला जो कुल जमां ४-५ वर्ष का हो चुका पर अभी नाम करण नही हुआ है .यह चौसा है .आम की एक चौकडी है इधर -दशहरी ,चौसा ,लंगडा ऑर सफेदा .मुझे चौसा सबसे प्रिय है .आमों के बारे मे थोडा बहुत खोजबीन करना शुरू ही किया था कि पताचला अलफांसो ऑर हापुस एक ही आम ,दो नाम है .पूर्वोत्तर भारत मे अप्रैल माह से ठेलों पर जो आम दिखायी पड़ने लगता है वह दक्षिण भारत से आने वाले तोतापारी ,नीलम की खेप रहती है .अब तो कई नयी नस्लें विकसित हो गयी हैं जिसमे आम्रपाली की काफी चर्चा रहती है ।
दरअसल आमों के इतने ढेर सारे रूप रंग ,आकार प्रकार हैं कि उनकी सटीक तुलना महज नारी नख शिख सौन्दर्य के एक ईरोटिक अंग से हो सकती है .आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं ।
आम मुझे बहुत प्रिय हैं .कहते हैं गालिब बाबा को भी यह बेहद प्रिय था .आम को चूस कर खाने का अपना अलग ही आनंद है . इस सन्दर्भ मे भी आम की तुलना वाला रूपक मौजू है .










6 सुधी पाठकों की राय:
कम से कम फोटो तो न लगाते भाई ....अब दोपहरी मे ठेली वालो को देखना पड़ेगा.....
Kyaa baat hai arvind ji? Doosre din doosri post.
Waise aam ka zikra karke aapne munh ka mazaa badhaa diya. Agar Banaras men milne lagen hon, to do-chaar Lucknow bhi bhijwaayen.
शायद आपका रूपक लोगों को पसंद नहीं आया। क्योंकि ब्लॉग पर पधारे तो बहुत सारे लोग, पर बिना टिपियाए ही निकल लिए।
वैसे सच कहूं तो मुझे भी यह रूपक हजम नहीं हो रहा है। शायद हाजमोला....
Aprim men aamon ki charcha sun kar munh men paani aa gaya. Waise jahan tak roopak ki baat hai, main mahamantree jee ki baaton kaa samarthan hi karoonga. Mujhe lagta hai ki yah post likhte samay aap kuchh jyaada hi mood men the. Sahi kaha na?
Aapki post sundar hai aur aapke kavi man ki pahchaan karati hai.
anaam prashansak ek gaharee tees chhod jate hain- chaliye ve to mujhe janate/janatee hain -yahee kyaa kam hai ?
Post a Comment