अब्राहम लिंकन के अचेत मन के किसी कोने में महान बनने के लिए इच्छा छुपी हुई थी। वह एक साधारण क्लर्क होते हुए भी अमरीका का राष्ट्रपति बनना चाहता था। महात्मा गांधी तथा मद टेरेसा ने महान बनने के लिए भिन्न प्रकार का मार्ग अपनाया। पाकिस्तानी जनरल जिया उल हक तथा फिजी के जनरल रामबुका ने महान बनने के लिए बेईमानी के रास्ते अपनाए तथा वह घंटों में ही महान बन गये।
आस्ट्रेलिया के पूंजीपति एलन ब्रांड तथा कैरी पैकर और भारत के टाटा बिड़ना ने महाने बनने के लिए इनसे भिन्न मार्ग चुना। स्त्रियों द्वारा मनमोहक डिजायनों के कपड़े तथा गहने पहनना तथा संवरना भी उनकी अंदरूनी इच्छा होती है, दूसरों को अपनी ओर अकर्षित करने की इच्छा का ही एक प्रदर्शन होता है। इस पुस्तक को लिखने का कई कारणों में एक समाल में महत्वपूर्ण व्यक्ति बनना भी है।
इतिहास के पन्ने प्रसिद्ध व्यक्तियों के महान बनने की भावना के लिए किए गये संघर्षों की गाथाओं से भरे पड़े हैं। जो लोग अपने नामों के साथ संत, भगवान, गुरू, महाराज तथा श्रीमान आदि जैसे शब्द जोड़ लेते हैं, वह एक प्रकार से महान बनने की लालसा को ही पूरा करते हैं।
मर्सिडीज़ या मारूती कार, बड़ा सा शाही ठाठ वाला बंगला लेने, अफसर बनने तथा कीमती पोशाकों तथा हीरे जवाहरातों से जड़े आभूषण पहनने में भी हमारी महान बनने की इच्छा झलकती है। इस प्रकार पेशेवराना तथा शौकिया किस्मत बताने वाले भी यह पेशा इसलिए अपनाते हैं ताकि उनके महान बनने की इच्छा पूरी हो सके। अन्य पेशों में लगे हुए लोगों की तरह किस्मत बताने वाले भी अपने कारोबार को चमकाने के लिए उन सभी ढ़ंगों को अपनाते हैं, जिनसे उनका धंधा आधुनिक दिखाई दे। कम्प्यूटर को इसमें प्रयोग करना यही दर्शाता है।
अन्य कारोबारों तथा किस्मत बताने वालों के धंधें में अन्तर होता है। पहली प्रकार के लोग पैसे के बदले ग्राहक को कुछ देते हैं पर किस्मत बताने वाले कुछ भी नहीं देते। वह अपने ग्राहकों को बुद्धू बना कर अंधविश्वासी बना देते हैं। किस्मत देखने वाले लोगों को धोखा देने तथा उनकी अज्ञानता तथा भोलेपन के साथ-साथ उनकी किस्मत में विश्वास का दुरूपयोग करने में काफी होशियार होते हैं।
किस्मत बताना उतना ही सरल है, जितना कार चलाना। इस काम में किसी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं पड़ती। शारीरिक परिश्रम करने वाले मज़दूर से लेकर बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे व्यक्ति तक कोई भी चालाक व्यक्ति किस्मत बताने वाला बन सकता है। केवल मनोविज्ञान सम्बंधी साधारण ज्ञज्ञन की पुस्तक पढ़ना तथा इस ज्ञान को उपयुक्त ढंग से प्रयोग करना ही ज्योतिष सीखना है। सबसे पहले यह काम अपने दोस्तों, सहपाठियों तथा रिश्तेदारों से आरम्भ करना चाहिए। किसी अखबार या रिसाले के सम्पादक से सम्बंध स्थापित करना या कमीशन तक करने की कोशिश की जानी चाहिए।
केवल दो या तीन लेख लिखकर ही वह आपको अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि वाला किस्मत बताने का विशेषज्ञ स्थापिक कर सकते हैं। फिर जल्दी ही आप छठी इन्द्री या इलाही वाणी होने का दावा करके अपनी दुकान खोलने के लिए परिपक्त बन जाएंगे। आप यह भी दावा कर कसते हैं कि प्रधानमंत्री, मन्त्री, डॉक्टर, वकील, फिल्मी सितारे तथा संगीतकार, महान हस्तियाँ आपके ही ग्राहक हैं। आप किसी हवाई दुर्घटना के बारे में, भूचाल आने के बारे में, राष्ठ्रपति, तानाशाह या प्रधानमंत्री के कत्ल किये जाने के बारे में भविष्यवाणी करने का दावा भी कर सकते हैं। इनके सच्चे होने की कर्त चिंता न करें। कौन सी बात में किसी ने जांच पड़ताल करनी है।
ग्राहक जो सुनना पसंद करता है, किस्मत बताने वाले उसे वही कुछ बताने का प्रयास करते हैं। वह व्यक्ति की शारीरिक तथा मानसिक कमज़ोरियों के विषय में जानते हैं। कौन यह सुनना पसंद नहीं करता कि आने वाले चंद रोज़ उसकी इज्जत तथा दौलत में वृद्धि करेंगे? हर एक व्यक्ति अपनी असफलताओं की जुम्मेवारी किस्मत को ठहराना चाहता है। यह सुनना अधिक संतोष देता है कि आप अपने जीवन साथी से इसलिए वंचित हुए हैं क्योंकि आपके ग्रह अशुभ थे या आपकी शादी अशुभ मुहुर्त में हुई थी। कोई भी यह नहीं सुनना चाहेगा कि यह दुर्घटना आपके व्यक्तित्व की कमजोरी या आपकी किसी मूर्खतापूर्ण कार्यवाही के कारण घटी है।
कितना अच्छा लगता है यह सुनना कि आपकी निर्धनता आपकी जीवन योजना में गलती होने के कारण नहीं बल्कि जन्म गलत समय में होने के कारण है। किस्मत बताने वाले, व्यक्ति के लक्षणों के जानकार होते हैं तथा वे जानते है कि हर व्यक्ति प्यार, घृणा, गुस्सा, दयालुता, जिददीपन, डर, दुख, लालसा, खुशी, मित्रता तथा घमण्ड जैसी भावनाएं मौजूद हैं तथा किस्मत बताते समय इन्हीं भावनाओं की जानकारी होने से वह अच्छा कमा लेते हैं।
यह एक विश्वव्यापी सच्चाई हे कि लोग अपने बारे में की गयी भविष्यवाणियाँ लम्बे समय तक याद नहीं रखा करते। वह भविष्यवाणियों की जांच पड़ताल करने की इच्छा नहीं रखते। वह केवल सच्ची भविष्यवाणियों को याद रखते हैं जबकि झूठी भविष्यवाणियों को भूल जाते हैं। इसके अतिरिक्त वह संयोगवश घटी सच्ची घटना को बढ़ा-चढ़ा कर देखते हैं।
किस्मत बताने वाले मौका परस्त होते हैं तथा वे इस ढंग से बातचीत करते हैं कि उनके द्वारा की गयी भविष्यवाणी को कई तरह से समझा जा सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह जाने हैं कि उनके ग्राहक भोले भाले तथा अंधविश्वासी हैं।
मनजीत सिंह बोपाराय
(ज्योतिष झूठ बोलता है, पृष्ठ-110, तर्कभारती प्रकाशन, बरनाला, पंजाब से साभार)
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